इस नरसंहार से बच कर कुछ सुरक्षाकर्मी हमारे इलाक़े में भाग आए थे जिनका पीछा करते हुए दाइशी आतंकी भी हमारे इलाक़े में आ गए। कुछ ने मेरे घर में शरण ली और हमने महिलाओं के लिबास देकर उन्हें भाग निकलने में मदद दी।
मेरे पति ने तीन शीया कैडिट्स को मस्जिद में छिपा दिया, वह बसरा शहर के रहने वाले थे।
उसी रात तीन बजे दाइशी आतंकी हमारे घर आ पहुंचे क्योंकि उन्हें पता चल गया था कि हम रंगरूटों की मदद कर रहे हैं। उन्होंने मस्जिद में छिपे बसरा के रंगरूटों को खोज लिया और तत्काल उन्हें मौत के घाट उतार दिया। वह मेरे पति को अपने साथ ले गए जिसके बाद से आज तक उनका कुछ पता नहीं है। आतंकी पुनः हमारे घर आए और उन्होंने हमारे बाहर निकाल कर घर को धमाके से उड़ा दिया। हमारा घर काफ़ी बड़ा था उसमें कुछ कमरों को हमने तुर्कमन शिक्षिकाओं को किराए पर दे रखा था। मैं अपने छोटे बच्चे और तुर्कमन शिक्षिकाओं के साथ घर से निकली। हम जा रहे थे कि अचानक आतंकियों ने हमें रोक लिया और हमें एक गैरेज में ले गए। हमारे साथ कुछ दूसरी लड़कियां और महिलाएं भी उन्होंने पकड़ रखी थीं।
















/odishatv/media/media_files/2026/04/19/billionaire-entrepreneur-2026-04-19-23-55-02.jpg)


