बाक़ी महिलाएं बीस से तीस साल के बीच की थीं। यह आतंकी सब को बुरी तरह पीटते थे और बलात्कार करते थे। एक लड़की बहुत ख़ूबसूरत थी जिसका उन्होंने इतना बलात्कार किया कि उसने भी दम तोड़ दिया। एक और लड़की कुछ ही देर बाद बहुत अधिक ख़ून बह जाने के कारण अचानक गिर पड़ी और मर गई। थोड़ी ही देर में सारी लड़कियां मृत पड़ी थीं।
मैंने इन आतंकियों के चेहरे को ग़ौर से देखा तो उनमें से दो के चेहरे मेरि लिए परिचित थे। वह दोनों हमारे पड़ोस के गांव के रहने वाले थे जो दाइश में शामिल हो गए थे। वह सुन्नी गांव के थे। इस गांव के बहुत से लोग दाइश में शामिल हो गए थे जबकि दूसरे बहुत से सुन्नियों ने दाइश का विरोध भी किया था।
















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