तुर्कमन शिक्षिका का बच्चा रास्ते में मर गया। पांच दिन बाद हम लोग करकूक पहुंचे। मैं अपनी फुफी के घर चली गई जो करकूक में रहती थीं। मेरे साथ भागने वाली एक लड़की की इतनी बुरी हालत हो गई और वह मानसिक रूप से इतनी प्रताड़ित हुई कि इस समय ईरान में उसका इलाज चल रहा है।
मैंने क़बरिस्तानों में बहुत खोजा लेकिन मुझे अपने पति का कुछ सुराग़ नहीं मिल पाया। मैंने अपने पति की बेटी और उस अच्छे आदमी की क़बरें भी खोजने की बड़ी कोशिश की लेकिन मुझे कुछ नहीं मिला।


















