“पुराने लखनऊ के हुसैनाबाद इलाके से एक बड़ी खबर सामने आ रही है…
अज़ादारी रोड की दुकानों को लेकर अब सवाल तेज़ हो गए हैं।

स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि
दुकानों के आवंटन, रिकॉर्ड और किरायेदारी में भारी अनियमितताएँ हुई हैं।
कहा जा रहा है कि कई दुकानों के दस्तावेज़ों में गड़बड़ियाँ हैं,
जबकि कुछ मामलों में नियमों को दरकिनार करने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।
इसी बीच अब इस पूरे मामले की
CBI जांच की मांग ज़ोर पकड़ती जा रही है।
इस सिलसिले में टुंडे कबाबिये की दूकान भी शुरू से ही सवालों के घेरे मैं है, हुसैनाबाद ट्रस्ट पैर आरोप है तालाब की एक सहनची जो धरोहर है एक स्थानिये नेता के प्रयास से दी गयी है.जिन पर आरोप है कि हुसैनाबाद तरस की सम्पतियों की बर्बादी में उनका पूरा हाथ है. इस पूरे प्रकरण में पारदर्शिता नहीं है.इसके अतरिक्त कबाब वाले ने तालाब के बिलकुल पास अनधिकृत क़ब्ज़ा कर केआउटलेट को बढ़ा लिया है.
हुसैनाबाद और आसपास के इलाकों में इस मुद्दे को लेकर चर्चाओं का बाज़ार गर्म है।
लोग सवाल उठा रहे हैं कि
अगर सब कुछ पारदर्शी था…
तो फिर रिकॉर्ड को लेकर इतने विवाद क्यों सामने आ रहे हैं?
अब निगाहें प्रशासन और संबंधित विभागों पर टिकी हैं।
क्या इस मामले की निष्पक्ष जांच होगी?
क्या सच्चाई जनता के सामने आएगी?
फिलहाल…
अज़ादारी रोड की दुकानों का मामला
पुराने लखनऊ की सबसे चर्चित खबर बन चुका है…”

















