एक दिन आतंकी आए और उन्होंने हमें दो भागों में बांट दिया। एक गुट को वह लेकर चले गए और मैं गैरेज में ही रह गई मेरे साथ मेरा छोटा बच्चा और एक तुर्कमन शिक्षिका का बच्चा था। शिक्षिका बार बार बलात्कार के कारण मर गई थी। निगरानी करने वाले व्यक्ति ने हमसे कहा कि यह आतंकी तुम लोगों को भी अपने साथ ले जाएंगे अतः तुम लोग फ़ौरन यहां से भाग जाओ। उसने हमें उस इलाक़े से बाहर तक पहुंचाया और फिर लौट गया। बाद में मुझे पता चला कि आतंकियों ने उस व्यक्ति को मारा डाला था क्योंकि उसने भागने में हमारी मदद की थी। वह बहुत अच्छा आदमी था।
हम रेगिस्तान में चलते रहे। पानी बरसने लगा ज़मीन पर कीचड़ फैल गया। हमारे पास खाने के लिए कुछ नहीं था अतः हम रास्ते में मिलने वाली घास से पेट भर रहे थे।
















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