भारत में इस समय एयरलाइंस सेक्टर “तेज़ बढ़त” और “भारी दबाव” — दोनों का मिश्रण दिखा रहा है। एक तरफ़ हवाई यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, दूसरी तरफ़ एयरलाइंस को ईंधन की कीमत, युद्ध जैसी अंतरराष्ट्रीय स्थितियों और आर्थिक दबावों से जूझना पड़ रहा है।

मुख्य स्थिति इस तरह है: घरेलू हवाई यात्रा अभी भी मज़बूत है। जनवरी–मार्च 2026 में करीब 4.37 करोड़ यात्रियों ने उड़ान भरी। IndiGo भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन बनी हुई है और उसका बाज़ार हिस्सा 63% से ज़्यादा है। Air India समूह दूसरे नंबर पर है, जबकि Akasa Air धीरे-धीरे तेज़ी से बढ़ रही है।
SpiceJet अभी भी वित्तीय दबाव और कम होती हिस्सेदारी से संघर्ष कर रही है। अभी सबसे बड़ी समस्याएँ क्या हैं? महँगा ATF (एविएशन फ्यूल) जेट फ्यूल की कीमतें बहुत बढ़ी हुई हैं, जिससे एयरलाइंस का खर्च बढ़ गया है। मध्य-पूर्व तनाव का असर ईरान–मिडिल ईस्ट तनाव के कारण कई उड़ानों के रूट बदलने पड़े, कुछ फ्लाइट्स रद्द हुईं और ऑपरेशन महँगा हुआ।
दो कंपनियों का दबदबा इंडिगो और एयर इंडिया मिलकर लगभग 90% घरेलू बाजार नियंत्रित कर रहे हैं। इससे प्रतिस्पर्धा कम होने की चिंता बढ़ रही है। विमानों और इंजनों की कमी कई एयरलाइंस के कुछ विमान इंजन और सप्लाई चेन समस्याओं के कारण ग्राउंडेड पड़े हैं। फिर भी कुछ अच्छी बातें: नए एयरपोर्ट और नए रूट खुल रहे हैं। Akasa Air और दूसरी कंपनियाँ विस्तार कर रही हैं, जैसे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से नई उड़ानें।














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