गुजरात में अल्पेश और कांग्रेस के साथ आने का असर सीधे तौर पर टिकटों के बंटवारे पर भी दिखेगा. सूबे की 182 में से करीब 100 सीटों पर ओबीसी वोट निर्णायक साबित हो सकता है.
खिलाड़ी नंबर 3- जिग्नेश मेवाणी
गुजरात के इन चुनावों का तीसरा बड़ा चेहरा है—जिग्नेश मेवाणी. जिग्नेश, दलित अधिकार मंच के नेता हैं. साल 2016 में उन्होंने ऊना में एक बड़े लेकिन शांति से चलने वाले आंदोलन का नेतृत्व किया. ये ऐलान किया गया कि दलित लोग समाज के लिए गंदा काम नहीं करेंगे यानी पशुओं का चमड़ा निकालने का काम. 35 साल के जिग्नेश, कई साल पत्रकारिता कर चुके हैं. वो लोगों की नब्ज समझते हैं. सियासत में जनता की नब्ज समझना बड़े काम का साबित होता है. गुजरात में दलितों की आबादी करीब 7 फीसदी है. लेकिन, जिग्नेश अगर कांग्रेस के साथ औपचारिक तौर पर जुड़ते हैं तो इसके मायने कुछ ज्यादा होंगे. हालांकि, चर्चा तो जिग्नेश के आम आदमी पार्टी के साथ जाने को लेकर भी है. जिग्नेश का अगला कदम बहुत जल्द सामने आ जाएगा लेकिन जो चीज अभी से सामने है वो ये कि जिग्नेश मेवाणी, बीजेपी के किले की बुनियाद कमजोर होने पर आखिरी धक्का देने लायक ताकत जुटाने का दम रखते हैं.


















