इनमें सीने में जलने से लेकर पेशाब का लाल होना तथा लीवर सम्बन्धित रोग प्रमुख हैं। इन्हीं परेशानियों के चलते व्यक्ति कई बार दवाएं लेना छोड़ देता है। टीबी की दवाओं को शुरू करने के बाद छोड़ देना ही उसे ड्रग रजिसटेंस टीबी की ओर ले जाता है। डॉ. बेहरा ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति में डायबिटीज हो तो उसे ड्रग रजिसटेंस टीबी होने की संभावना छह प्रतिशत बढ़ जाती है।
भारत में इस आंकड़ा बहुत अधिक है। उन्होंने बताया कि डब्लूएचओ के अनुसार विश्व के कुल टीबी रोगियों का 27 प्रतिशत हिस्सा भारत में है। देश में वर्तमान में करीब 1.30 लाख ड्रग रजिसटेंस टीबी के रोगी हैं।
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