डायबिटीज, सिलिकोसिस, यूरिन इन्फेक्शन व एचआईवी जैसे मामलों का पता लगाने का प्रयास करें। यदि किसी मरीज में किसी अन्य रोग के लक्षण प्रकट हो तो तत्काल उसका इलाज करें क्योंकि यदि ऐसा नहीं किया गया तो टीबी की दवा छह माह खाने के बाद भी मरीज में टीबी के बैक्टीरिया बने रहेंगे।

दवाओं के कई साइड इफेक्ट ही डीआर की वजह
पीजीआई चण्डीगढ़ से आए पल्मोनरी विभाग के डॉ. डी. बेहरा ने बताया कि डीआर यानि ड्रग रजिसटेंस की असली वजह टीबी की दवाओं के साइड इफेक्ट हैं। उन्होंने बताया कि सामान्य रूप से जब कोई व्यक्ति टीबी की दवा खाना शुरू करता है तो उसके शरीर पर दवाओं के साइड इफेक्ट शुरू हो जाते हैं।
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