
उन्होंने बताया कि सरकारी क्षेत्र में तो टीबी का पता लगने के बाद मरीज का लेखा जोखा रखा जाता है लेकिन अधिकांश निजी चिकित्सक ऐसा नहीं करते। टीबी डायग्नोस होते ही डाक्टर ने अपनी फीस ली और मरीज को दवा लिख दी जाती है। मरीज ने दवा ली या नहीं इस बारे में डाक्टर को किसी प्रकार की जानकारी लेने की फुर्सत नहीं है।
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