
साह जी की ड्योढ़ी मे शयाम बेनेगल की फिल्म जूनून की शूटिंग भी हो चुकी है और यह भी अजीब इत्तेफ़ाक़ है की कुलभूषण खरबंदा ने इस फिल्म मे भी एक साहूकार का रोले अदा किया था और उर्दू की प्रसिद्द लेखिका अस्मत चुग़ताई ने अपने एक रोले मे अपने परिवार के साथ इन्क़िलेबिायों से छुपने के लिये इसी मकान मे पनाह ली थी
मिर्ज़ा मंडी मे अब पुराने मकान तेज़ी से नये होते जा रहे हैं दो चार क़दीमी हवेलियां बची हैं.उनकी भी हालत जर्जर है.
केन्द्र और उत्तर प्रदेश सरकर को चाहिये इस सम्पति को खरीद कर यहाँ बेगम हज़रत महल की यादगार स्थापित करे
(मिर्ज़ा मंडी के कुछ दूसरे सुन्दर भवनों को तस्वीरें यहाँ दी जा रही हैं )
begum hazrat mahal















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