
साह जी ड्योढ़ी और बेगंम हज़रत महल का ठहरना
अवध के आखरी ताजदार वाजिद अली शाह के माटिएबूर्ज जाने के बाद ग़दर में उनकी पत्नी बेगम हज़रत महल ने ईस्ट इंडिया कंपनी से मोर्चा लेने की ठानी और क़ैसरबाग़ को त्याग कर नाल दरवाज़े मे ही रहना पसंद किया ..मिर्ज़ा मंडी मे ही साह जी की ड्योढ़ी बहुत मश्हूर थी..साह जी का सम्बन्ध फर्रुखाबाद से था साहूकारी पेशा था,अवध के इतिहास मे उनका नाम बड़ी इज़्ज़त से लिया जाता है ,वह कट्टर और नेक हिन्दू थे और अपना काफी धन धर्मार्थ मे खर्च करते थे.शरफ उद दौला बहुत दूर दृष्टि रखते थे उन्होने बेगम हज़रत महल को मशविरा दिया कि वह यहाँ से कहीं और कूच करें ताकि गोरे (ईस्ट इंडिया कंपनी )जो यहाँ से बहुत क़रीब हैं उनकी नज़र से दूर रह सकें और स्थीति ख़राब हुई तो उसका सम्भालना मुश्किल होजायेगा, और आप का यह सेवक रुस्वा होजायेगा
begum hazrat mahal
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