
इतिहासकार आग़ा मेहदी अपनी प्रसिद्ध किताब तारीखे लखनऊ मे लिखते हैं नाल दरवाज़ा शायद इस वजह से कहा जाता है की नाल बंदी टोले की तरह शायद यहाँ भी घोड़ों की नालबंदी की जाती थी. यहीं शरफ उद दौला का मकान था और वह ग़दर मे इसी मकान का फाटक बंद करके अंदर बैठ रहे थे. लकिन हंगामे के बाद किसी न किसी तरह वह यहाँ से निकलने मे सफल हुवे
begum hazrat mahal
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