‘आंतरिक’ घपलेबाजी होने का खतरा
अच्छी तरह से जमे हुए कुछ राजनितिक सूत्रों के मुताबिक, अगर ‘आंतरिक’ अच्छी सांठगांठ हो तो चुनाव के नतीजे पर असर पड़ सकता है लेकिन यहाँ सवाल ये पैदा होता है की ये आंतरिक कौन होते है | जैसा की पारंपरिक बैलट प्रणाली में ‘आंतरिक ‘ चुनाव अधिकारी होते थे लेकिन evm इन आंतरिक लोगो की एक श्रंखला बना देती है जो की भारत निर्वाचन आयोग के दायरे और नियंत्रण से बाहर हैं
इन “अंदरूनी सूत्रों” के कुछ चुनावों फिक्सिंग में संदिग्ध गतिविधियों में शामिल होने की पूरी संभावना हो सकती है . सम्पूर्ण विश्व को छोड़ सिर्फ भारत में ही चुनाव आयोग ने इस ‘आंतरिक सूत्र ‘ के खतरे को जिंदा किया हुआ है |ये आंतरिक सूत्र इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन बनाने वाली कंपनी ,भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड(BEL) और इलेक्ट्रॉनिक्स कारपोरेशन ऑफ़ इन्डिया (ECIL), विदेशी कंपनियां जो EVM के लिए चिप सप्लाई करती है , निजी कंपनियां जो की evm का रखरखाव और जाँच पड़ताल करती है (जिसमे से कुछ कंपनियां राजनेता ही चला रहे है ) इनमे से कोई भी हो सकती है |



















