चुनाव आयोग ने 2004 और 2009 के आम चुनाव मे इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का आम उपयोग जिस तरह किया, क्या वह सुप्रीम कोर्ट के 1984 के फैसले और रेप्रेज़ेंटेशन ऑफ पीपल (आ) एक्ट 1951 का खुला उलंघन नहीं है ?
EVM का सॉफ्टवेर सुरक्षित नही है
इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन सिर्फ और सिर्फ तब ही सुरक्षित है जब तक इसमें वास्तविक कोड प्रणाली इस्तेमाल की जाती है | लेकिन चौकाने वाला तथ्य ये है की EVM मशीन निर्माता कंपनी BEL एंड ECIL ने ये टॉप सीक्रेट (EVM मशीन के सॉफ्टवेर कोड ) को दो विदेशी कंपनियो के साथ साझा किया गया है विदेशी कंपनियों को दिया सॉफ्टवेयर भी जाहिरा तौर पर सुरक्षा कारणों से, निर्वाचन आयोग के पास उपलब्ध नहीं है.
ईवीएम का हार्डवेयर भी सुरक्षित नहीं है
ईवीएम का खतरा सिर्फ उसके सॉफ्टवेर में छेड़खानी से ही नही होता यहाँ तक की उसका हार्डवेयर भी सुरक्षित नहीं है डॉ अलेक्स हैल्दरमैन मिशिगन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर के मुताबिक ” ईवीएम में जो सॉफ्टवेर इस्तेमाल किया जाता है वो वोटिंग मशीन के लिए बनाया गया है अगर वो किसी सॉफ्टवेर हमले से नष्ट होता है तो नया सॉफ्टवेर तैयार किया जा सकता है और यही बात इसके हार्डवेयर पर भी लागू होती है ” संछेप में भारतीय ईवीएम का कोई सा भी पार्ट आसानी से बदला जा सकता है



















