हर एक ईवीएम के कण्ट्रोल यूनिट में दो EEPROMs होते हिया जो मतदान को सुरक्षित रखते है | यह पूरी तरह से असुरक्षित है और EEPROMs में संरक्षित किया गया डाटा बाहरी सोर्स से बदला जा सकता है | EEPROMs से डाटा पढना और उसे बदलना बहुत आसान है
दूसरा तरीका और भी अधिक खतरनाक है , इसमें कण्ट्रोल यूनिट के डिस्प्ले सेक्शन में ट्रोजन लिप्त एक चिप लगाकर हैक किया जा सकता है इसे बदलने में सिर्फ 2 मिनट लगते है और सिर्फ 500-600 रुपए में पूरी तरह से यूनिट चिप (हार्डवेयर) बदलने का खर्चा आ जाता | इस तरह से नयी लगाई हुई चिप पुरानी सभी आंतरिक सुरक्षा को बाईपास कर देती है ,यह चिप नतीजो को बदल सकता है और स्क्रीन पर फिक्स्ड रिजल्ट दिखाया जा सकता है चुनाव आयोग ने इस तरह की संभावनाओं को पूरी तरह से बेखबर है.




















