हालांकि जब उन्होंने अगवा किया तब इस तरह के कोई संकेत नहीं मिले थे जिससे पता चल सके कि वो पैसा चाहते हैं. फादर टॉम का कहना है, ”ज़ाहिर है अगर ये शुरू में ही पूछते कि क्या तुम्हारी सरकार मदद करेगी तो मैं कहता कि मुझे नहीं पता है. अगर वो पूछते कि पोप मदद करेंगे तब भी मैं कहता कि नहीं पता है. बिशप? मैंने कहा कि अगर इनमें से कोई कुछ कर सकता है तो वो मेरी जान बचाएंगे.”
फादर टॉम को दवाई और खाना देने से इनकार नहीं किया गया. जब वो बीमार पड़े तो उन्हें इंसुलिन तक मुहैया कराया गया. फादर टॉम ने कहा कि खाने की मात्रा ज़्यादा होती थी इसलिए कम करने का आग्रह किया था. क्या फादर टॉम ने कभी इसके बारे में नहीं सोचा कि अपहरणकर्ताओं ने उन्हें नुक़सान क्यों नहीं पहुंचाया?


















