
इस चर्चा पर प्रख्यात इतिहासकार प्रोफेसर डी एन झा, जिन्होंने “द माइथ ऑफ द होली काऊ” लिखी है ने इतिहास से जुड़े तर्कों को संक्षेप में बताते हुए कहा कि हमारे पूर्वज गोमांस खाने के पक्ष में थे।
इतिहास इस बात का गवाह है कि इसके लिए गाय की बलि वे अपने हाथों से देते थे।
भारत माता, गोमाता और हिदुत्व 19वीं सदी की अवधारणा है, हमें इसकी पुरातनता पर सवाल करना चाहिए।


















