शाहरनामा ब्यूरो
जब भारतीय सिनेमा के इतिहास की बात होती है तो ज़हन में सबसे पहले मुंबई का नाम आता है। लेकिन मुंबई की फिल्मी दुनिया को संवारने वालों में लखनऊ का योगदान उतना ही गहरा है, जितना इस शहर की तहज़ीब।
यही शहर ऐसे कलाकारों की जन्मस्थली और कर्मभूमि रहा, जिन्होंने संगीत, अभिनय, निर्देशन और अदाकारी के ज़रिए भारतीय सिनेमा को नई पहचान दी।
लखनऊ की गलियों में पली-बढ़ी नज़ाकत, अदब, शायरी, ग़ज़ल और संगीत ने फ़िल्मी दुनिया को ऐसी विरासत दी, जिसका असर आज भी महसूस किया जाता है।
सुरों का बादशाह: नौशाद
लखनऊ का नाम आते ही सबसे पहले याद आते हैं महान संगीतकार नौशाद अली। साधारण परिवार से निकलकर मुंबई पहुँचे नौशाद ने भारतीय फ़िल्म संगीत की तस्वीर बदल दी। बैजू बावरा, मुग़ल-ए-आज़म, मदर इंडिया, गंगा जमुना जैसी फ़िल्मों का संगीत आज भी अमर है। उन्होंने शास्त्रीय संगीत को लोकप्रिय सिनेमा का हिस्सा बनाया।
मख़मली आवाज़: तलत महमूद
तलत महमूद की आवाज़ में ऐसी नरमी थी कि उन्हें “मख़मली आवाज़” कहा गया। उन्होंने न सिर्फ़ गायक बल्कि अभिनेता के रूप में भी काम किया। आज भी उनके गाए गीत संगीत प्रेमियों की पहली पसंद हैं।
मुज़फ़्फ़र अली और ‘उमराव जान’
अगर किसी फ़िल्म ने अवध की तहज़ीब को सबसे खूबसूरती से पर्दे पर उतारा तो वह थी उमराव जान। निर्देशक मुज़फ़्फ़र अली ने लखनऊ की संस्कृति, भाषा, शायरी और नफ़ासत को दुनिया के सामने पेश किया। आज भी इस फ़िल्म का नाम आते ही लखनऊ की गलियाँ आँखों के सामने तैरने लगती हैं।
नई पीढ़ी का चेहरा: अली फ़ज़ल
लखनऊ के अली फ़ज़ल ने बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक अपनी अलग पहचान बनाई। 3 Idiots, Fukrey, Mirzapur और हॉलीवुड की फ़िल्मों में उनका अभिनय इस बात का प्रमाण है कि लखनऊ की प्रतिभा आज भी वैश्विक मंच पर चमक रही है।
लखनऊ के नौजवान लेखक और निर्देशक मुन्ज़िर नक़वी की ज़बरदस्त फिल्म सहर हमेशा याद रखी जायेगी। फिल्म मे पंकज कपूर ने बेहतरीन रोल अदा किया है।
गंभीर सिनेमा के निर्देशक: सुधीर मिश्रा
निर्देशक सुधीर मिश्रा ने भारतीय समानांतर सिनेमा को नई दिशा दी। उनकी फ़िल्मों में समाज, राजनीति और इंसानी रिश्तों की गहरी समझ दिखाई देती है।
संगीत की नई आवाज़
गायिका कनिका कपूर ने आधुनिक बॉलीवुड संगीत में अपनी अलग जगह बनाई। उनके कई गीत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय हुए।
जब लखनऊ बना फिल्मी सेट
लखनऊ सिर्फ कलाकारों का शहर नहीं, बल्कि फिल्मकारों की पसंदीदा लोकेशन भी रहा है। बड़ा इमामबाड़ा, रूमी दरवाज़ा, चौक, हुसैनाबाद, कैसरबाग़ और पुराने महल दर्जनों फिल्मों और वेब सीरीज़ में दिखाई दे चुके हैं।
उमराव जान, शतरंज के खिलाड़ी, जॉली एलएलबी 2, गुलाबो सिताबो, तनु वेड्स मनु और कई अन्य फिल्मों ने लखनऊ की खूबसूरती को दुनिया तक पहुँचाया।
एक खोया हुआ सपना
बहुत कम लोग जानते हैं कि एक दौर में लखनऊ में फिल्म स्टूडियो विकसित करने की कोशिशें भी हुई थीं। अगर वह सपना पूरी तरह साकार हो जाता तो संभव है कि उत्तर भारत का सबसे बड़ा फिल्म निर्माण केंद्र लखनऊ होता। आज भी समय-समय पर फिल्म सिटी की चर्चा होती है, लेकिन शहर अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान के कारण फिल्मकारों को लगातार आकर्षित करता है।
आज की ज़रूरत
ओटीटी और डिजिटल मीडिया के दौर में लखनऊ के पास फिर एक अवसर है। यहां के कलाकार, लेखक, सिनेमैटोग्राफर और तकनीशियन राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। यदि सरकार, निजी क्षेत्र और फिल्म उद्योग मिलकर आधुनिक स्टूडियो और प्रशिक्षण संस्थान विकसित करें तो लखनऊ एक बार फिर भारतीय सिनेमा के मानचित्र पर प्रमुख स्थान हासिल कर सकता है।
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