लखनऊ: अब जबके प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से यह घोषणा की गयी है के पूरा देश २१ दिन तक लॉक डाउन रहेगा ताकि कोरोना वायरस की बाबा से बचा जा सके ,विभिन्न ग्रुपों , संस्थाओं और संगठनों ने ग़रीबों,बेसहारा और दिहाड़ी मज़दूरों की मद्दद के लिये हाथ बढ़ाना शुरू कर दिये हैं.


इस सिलसिले में शहर के ऐतिहासिक सिब्तैनाबाद इमामबाड़े ने पहल की है और कच्ची खाद्य सामग्रियां वितरण करने का सिलसिला शुरू किया है.
समाज के प्रति हमेशा मानव हमदर्दी को मद्दे नज़र रखते हुवे वक़्फ़ इमामबाड़ा सिब्तैनाबाद के मुतवल्ली मोहम्मद हैदर ने फिलहाल जो प्रबंध किया है उनको उम्मीद है यह सामान भविष्य में और बढ़े गा

मानवता ही एकमात्र धर्म है जो समाज को जोड़ता है। इसी अवधारणा कें तत्क्रम में प्रबंध समिति वक्फ इमामबाड़ा सिबतैनाबाद, हज़रतगंज लखनऊ ने पहल करते हुए लॉक डाउन के चलते बेरोज़गार हुए गरीब निराश्रितों को राशन के पैकेट उपलब्ध कराते हुए संकट की इस घड़ी में अपना सामाजिक फ़र्ज़ अदा किया।

मोहम्मद हैदर अधिवक्ता
मोहम्मद हैदर ने बताया के राशन के ये पैकेट किसी धर्म विशेष को न दे कर धार्मिक सीमाओं से हट कर उन गरीब, असहाय,निराश्रितों को दिए गए जो रोज़ मेहनत मजदूरी कर के अपने एवं अपने परिवारों का जीवनयापन करते हैं, जिनमें प्रमुख रूप से रिक्शा वाले, पुताई वाले, मज़दूर, सफाई कर्मी, चौकीदार इत्यादि हैं।
आप को बता दें वक़्फ़ इमामबाड़ा सिब्तैनाबाद अवध के आखरी ताजदार वाजिद अली शाह के पिता अमजद अली शाह द्वारा निर्मित है और इस ईमारत में बादशाह की क़ब्र भी है



















