* कला धन वापस आया ?
भष्टाचार ख़त्म हुआ ?
जुर्म पे सज़ा मिली ?
क्राइम का आकड़ा कम हुआ ?
सही वक़्त है ज़ख्म कुरेद कर देखिए किन साहेब ने वफ़ा की- किस किस ने अपनी झोली भरी- ठेके पे ठेका देकर अपनी जेब भरी- और हम पे दादा गिरी करी, वोट ज़रूर करें- वोट हमारी ताक़त है.
चुनाव का मौसम है
वोटों कि बरसात करो
और हमको याद करो


















