अमूमन हर साल लंबित मामलों की यही स्थिति रहती है. लेकिन सरकार के नोटिफिकेशन के बाद स्थानीय थानों में मामले की जांच और उसकी विवेचना थाने के इंस्पेक्टर से किए जाने से अब लंबित मामलों की संख्या न के बराबर रह जाएगी. साथ ही स्थानीय थाना स्तरों पर ही दलितों के मामलों का निराकरण और उन्हें न्याय मिलेगा.
भोपाल के डीएसपी, दिनेश जोशी का कहना है कि, समाज के पिछड़े तबके को न्याय दिलाने के लिए सरकार ये अच्छा फैसला है. गंभीर मामलों की जांच, तो डीएसपी रैंक के अधिकारियों के जरिए ही कराई जाएगी, लेकिन रोजाना आने वाली शिकायतों का निराकरण और फरियादी को न्याय स्थानीय थाना स्तर पर ही मिलेगा.


















