इन तमाम समस्याओं से जूझ रहे पुलिस मुख्यालय ने बिहार पुलिस के एसटी एससी एक्ट की विवेचना से जुड़े मॉडल का अध्ययन किया और उसे एमपी में लागू करने के लिए सरकार के पास प्रस्ताव भेजा. पुलिस मुख्यालय के प्रस्ताव को हरी झंडी देते हुए सरकार ने एसटी एससी एक्ट से जुड़े मामलों की जांच के अधिकार का दायरा बढ़ा दिया.
दलित अपराधों को लेकर पहले क्या था…
-फरियादी को शिकायत के लिए जिले के अजाक थाने में जाना पड़ता था.
-थाने में होने वाली शिकायत की विवेचना डीएसपी रैंक के अधिकारी करते थे.
-FIR से लेकर चार्जशीट तक की कार्रवाई डीएसपी रैंक के अधिकारी करते थे.
-कोर्ट में तय समय सीमा होने के बावजूद 60 दिनों के बाद चार्जशीट पेश हो रही थी.
-शिकायत के बाद फरियादी को बार-बार अजाक थाने के चक्कर काटना पड़ता था.
-राजपत्रित अधिकारी के पास ही जांच करने का अधिकार था.


















