मध्यप्रदेश पुलिस ने बिहार मॉडल की तर्ज पर दलितों से जुड़े मामलों की जांच करना शुरू कर दिया है. शिवराज सरकार ने अनुसूचित जाति, जनजाति एक्ट में आने वाले मामलों की जांच का दायरा बढ़ाते हुए नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है.

मध्यप्रदेश पुलिस में एसटी, एससी से जुड़े मामलों की जांच के लिए हर जिले में एक अजाक थाना है. इन थानों के इंचार्ज डीएसपी रैंक के अधिकारी होते हैं. यही अधिकारी थाने में आने वाली शिकायतों की जांच से लेकर उसकी पूरी विवेचना कर कोर्ट में चार्जशीट दायर करते हैं.
दरअसल, एक ही अधिकारी पर तमाम मामलों की जांच का दबाव होने की वजह से फरियादी को न्याय मिलने में देरी हो रही थी. साथ ही फरियादी को अपना क्षेत्र छोड़कर शिकायत के लिए अजाक थाने के चक्कर काटने पड़ते थे. कोर्ट में चार्जशीट फाइल करने में समय लगता था. लंबित मामलों की संख्या भी हर साल बढ़ती जा रही थी.
















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