दलित अपराधों को लेकर अब क्या है…
-फरियादी अपनी शिकायत स्थानीय थाने में दर्ज करा सकता है.
-थाने में होने वाली शिकायत की विवेचना थाने का इंस्पेक्टर कर सकता है.
-डीएसपी के साथ इंस्पेक्टर रैंक का अधिकारी भी मामले की जांच कर सकता है.
-FIR से लेकर चार्जशीट तक की कार्रवाई इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी करेंगे.
-कोर्ट में तय समय सीमा 60 दिनों के अंदर ही चार्जशीट पेश होगी.
-स्थानीय थाने में शिकायत करने से अजाक थाने के चक्कर काटने की जरूरत नहीं.
-राजपत्रित अधिकारी के अलावा भी इंस्पेक्टर को जांच का अधिकारी मिला.
अनुसूचित जाति, जनजाति एक्ट के अपराधों की विवेचना अजाक थाने के इंचार्ज डीएसपी रैंक के अधिकारी करते थे. थानों में बढ़ती शिकायत और जांच के बढ़ते दबाव की वजह से 2016 में प्रदेश के अजाक थानों में दर्ज हुई 7504 एफआईआर में से बीस प्रतिशत मामले पेंडिंग रह गए.
















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