हाथ से मैला ढोना (मैन्युअल स्कवेंजिंग) भारत में प्रतिबंधित काम है. इसी साल मार्च में राज्यसभा में एक प्रश्न के जवाब में केंद्र सरकार में मंत्री थावरचंद गहलोत ने बताया था कि देश में 26 लाख ऐसे शौचालय हैं जहां पानी नहीं है. ज़ाहिर है वहां हाथ से मैला ढोना पड़ता है.
सफाई कर्मचारी आंदोलन ने अपने सर्वे में बताया है कि रिपोर्ट के मुताबिक साल 1993 से अब तक 1,370 सीवर वर्कर्स की मौत हो चुकी है. साल 2017 में मार्च से 15 मई के बीच ही ऐसे 40 कर्मचारी मारे गए.
सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे मृतकों के परिवारों को 10 लाख का मुआवज़ा देने का आदेश दिया था. 1370 में से सिर्फ 80 परिवारों को ही मुआवज़ा मिला है. 2013-14 में मैला ढोने वालों के पुनर्वास के लिए 557 करोड़ का बजट रखा गया था जबकि 2017-18 के बजट में सिर्फ 5 करोड़ रखा गया है.
मैला ढोने वालों की दुर्दशा
‘गाय मरे तो लोग सड़क पर, दलित मरे तो ख़ामोशी’
















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