3. बजट की किल्लत?
सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च की रिपोर्ट बताती है कि कई राज्यों को गाइडलाइंस के हिसाब से जितना पैसा जारी किया जाना था, उससे कम दिया गया. 18 जनवरी, 2017 तक राजस्थान को शहरी मिशन का 58% बजट दिया गया, वहीं असम को महज़ 6% मिला. उत्तर प्रदेश को शहरी मिशन में 15% तय बजट के बजाय 5% ही मिल पाया. स्वच्छता सर्वेक्षण 2017 में वाराणसी को छोड़कर उत्तर प्रदेश के बाकी सभी शहरों की रेटिंग 300 से कम है.
एक अनुमान के मुताबिक भारत में 1,57,478 टन कचरा हर रोज़ इकट्ठा होता है लेकिन सिर्फ 25.2% के निपटारे (ट्रीटमेंट एंड मैनेजमेंट) के लिए ही प्रबंध है. बाकी सारा कूड़ा खुले में पड़ा रहता है और प्रदूषण फैलाता रहता है. और दिल्ली के गाज़ीपुर में हुए हादसे जैसे ख़तरे भी पैदा करता है.
कचरे के प्रबंधन के लिए पहला कदम घर-घर से कूड़ा उठाना है लेकिन शहरों में अभी ये आंकड़ा सिर्फ 49% ही पहुंचा है. और बीते एक साल में इसमें महज़ 7% का ही सुधार आया है. कूड़ा प्रबंधन के लिए जो बजट रखा गया, वो राज्यों को 2016-17 में ही मिल पाया. इसकी वजह से शुरुआत धीमी रही. और गुजरात, असम, केरल जैसे राज्यों को इसके लिए अभी तक कोई पैसा नहीं दिया गया है.
















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