इस जुलूस में शाही मोम की ज़री की आलावा अबरक की ज़री भी शामिल थी और साथ में ठेलो पर फुलवारी सजी हुई थी, मेंहदी की आराइश भी साथ साथ चल रही थी इसमें 6 निजी बैंड और एक होमगार्ड बैंड भी शामिल था जो सोज़नाक तर्ज़ पर हज़रत इमाम हुसैन अस की मसायब बयान कर रहा था जिसे सुनकर अज़ादार रो रहे थे | शाही ज़रीह
इसके आलावा इस जुलूस में हाथी ,घोड़े ,और ऊठ भी शामिल होकर बिलकुल हज़रत इमाम हुसैन अस की सफर की मंज़रकशी कर रहे थे |धीरे -धीरे ये जुलूस बड़े इमामबाड़े से होता हुआ रूमी दरवाज़ा,नीबू पार्क, लाजपत नगर रोड,घंटाघर होते हुए छोटे इमामबाड़े पंहुचा जहाँ अज़ादारों ने देर तक अपने हुसैन को याद करते हुए मातम किया और उसके बाद जुलूस का सिलसिला ख़त्म हो गया | शाही ज़रीह

















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