इसी क़ाफिले की याद में आज का शाही मोम की ज़री का जुलूस निकाला जाता है|मौलाना ने जब हज़रत इमाम हुसैन अस की शहादत का उल्लेख किया तो अज़ादारों की आँखे भीग गयी और या हुसैन की आवाज़े बलन्द होने लगी ये अलग बात है की ज़ोरदार बारिश ने अज़ादारों का हज़रत इमाम हुसैन अस का जुलूस और उनके गम को आज़माने की लिए अज़ादारों का इम्तिहान लिया लेकिन जिस ग़म को मनाने की लिए लोगो ने तीर ,तलवार ,नैज़े ,भालो की परवाह नहीं की और उनका ग़म इसी शानों-शौकत से चौदह सौ बरस से मनाया जा रहा है तो अज़ादारों को ये हल्की सी बरसात क्या रोक सकती है |बहरहाल मजलिस की बाद ये जुलूस साये 8 बजे बड़े इमामबाड़े से बाहर निकल सका |
















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