Imambara of Raja Jhau Lal (जिसे बैतुल माल भी कहा जाता है) लखनऊ के पुराने ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों में से एक है, जो खास तौर पर मोहल्ला ठकुरगंज में स्थित है। यह इमामबाड़ा शिया समुदाय के लिए एक पूजा और यादगारी स्थल है और मोहल्ले की सांस्कृतिक तथा ऐतिहासिक पहचान का हिस्सा माना जाता है।
यह इमामबाड़ा राजा झाऊलाल श्रीवास्तव (Raja Jhau Lal Shrivastav) द्वारा बनवाया गया था, जो नवाब असफ-उद-दौला (Nawab Asaf-ud-Daula) के प्रधान वज़ीर (minister) थे।
खास बात यह है कि इसे किसी मुस्लिम द्वारा नहीं बल्कि एक हिन्दू व्यक्ति ने बनवाया — जिससे यह साम्प्रदायिक भाईचारे और आपसी सम्मान का प्रतीक माना जाता है।
यहाँ मुहर्रम के अवसर पर मज़लिस, नोहा-ख़्वानी और जुलूस जैसे कार्यक्रम बड़े श्रद्धा के साथ आयोजित होते हैं, और लोग कर्बला की याद में इकट्ठा होते हैं।
यह इमामबाड़ा शिया समुदाय के लिए पूजा-स्थल के रूप में उपयोग होता है, लेकिन हिन्दू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग यहाँ श्रद्धा के साथ आते हैं।
लखनऊ के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों में इसका एक अलग स्थान है क्योंकि यह ऐतिहासिक रूप से पारस्परिक सम्मान और दोस्ती का प्रतीक रहा है।



















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