इस पुस्तक में अधिवक्ताओं, इतिहासकारों, पुरातत्वविदों, सांस्कृतिक धरोहर के प्रेमियों एवं धर्म गुरूओं के उद्गार एवं संदेश है जो कि अत्यन्त उत्साहवर्धक है।

इस पुस्तक के प्रकाशन का मन्तव्य सिब्तैनाबाद के सघर्ष की गाथा को जन-जन तक पहुॅचाना है जिससे हम सब मिलकर एक ऐसा प्रयास करे जिससे कि हमारी संस्कृति और हमारी विरासत की रक्षा हो सकें।
















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