सन् 1857 के स्वतन्त्रता संग्राम में अंग्रेजों के द्वारा लखनऊ की लगभग समस्त ऐतिहासिक धरोहरों को नष्ट किया गया था और इस इमामबाड़े क¨ भी बहुत बुरी तरह नुकसान पहुॅचा था। इस इमामबाड़े का प्रयोग 1858-से 1860 के मध्य चर्च के रूप में भी हुआ था जिसमें उस समय के वाइसराॅय लार्ड कैनिंग के द्वारा एक प्रार्थना सभा में भी प्रतिभाग किया गया था। इमामबाड़े की सम्पत्तियों को वर्ष 1921 में लखनऊ इम्प्रूवमेन्ट ट्रस्ट (अब लखनऊ विकास प्राधिकरण) को बेच दिया गया था।

















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