उन्होंने क़ाहिरा में होने वाली सहमति के बारे में कहा कि हमास ने इस वार्ता में प्रतिरोध के हथियारों की रक्षा और अपने सिद्धांतों पर बल दिया, यदि हमें बहुत अधिक कठिनाइयों का सामना है, और भी कठिनाइयों का समाना करना पड़े तब भी हम इस आस्था और विश्वास को बदल नहीं सकते, हमास कभी भी अपने सिद्धांत से पीछे नहीं हटेगा और हथियार ज़मीन पर नहीं रखेगा।
हमास के नेता ने कहा कि हमास और फ़त्ह आंदोलन के बीच हुई सहमति को स्वीकार करने और न करने के बारे में ज़ायोनी प्रधानमंत्री ने कहा कि इस समझौेते को स्वीकार करने की हमारी तीन शर्त है, हमास को हथियार ज़मीन पर रखने होंग, इस्राईल को आधिकारिक रूप से स्वीकार करना होगा और ईरान से अपने संबंध तोड़ने होंगे किन्तु हमने जवाब में कहा कि हम अपने हथियार ज़मीन पर नहीं रखेंगे, इस्राईल को स्वीकार नहीं करेंगे और ईरान से अपने संबंध नहीं तोड़ेंगे बल्कि तेहरान से संबंध और अधिक मज़बूत करेंगे और तेहरान में हमारी उपस्थिति और हमारा कार्यालय, इसकी पुष्टि करता है।


















