नई दिल्ली। एक राष्ट्र, एक कर की अवधारणा को साकार करने वाले वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को अपना सफर पूरा करने में सत्रह वर्ष का समय लगा।राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने आजादी के बाद के सबसे बड़े आर्थिक सुधार (जीएसटी) को संसद के केन्द्रीय कक्ष में आयोजित भव्य जलसे में शुक्रवार को मध्य रात्रि इसका श्री गणेश किया।

जीएसटी की परिकल्पना की शुरूआत तत्कालिन वित्तमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने 1986-87 के बजट में की थी।
उन्होंने उत्पाद शुल्क ढांचे में बड़े बदलाव का प्रस्ताव किया था और वर्ष 2000 में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इस अवधारणा को पेश किया। इसके बाद पूर्व वित्त मंत्री पी चिदम्बर ने 28 फरवरी 2006 को बजट पेश करते हुए जीएसटी के क्रियान्वयन के लिये एक अप्रैल 2010 की तारीख तय की थी। वर्ष 2009 में विभिन्न राज्यों के वित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति ने जनता के विचारार्थ इसे पेश किया।














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