ईरान के राष्ट्रपति की इराक यात्रा के कुछ ही दिनों बाद सऊदी अरब ने एक आर्थिक और सुरक्षा प्रतिनिधिमंडल इराक भेजा है और सऊदी नरेश ने भी घोषणा की है कि वह इराक को मूल्यवान उपहार देंगे।

हालिया वर्षों में इराक और सऊदी अरब के संबंध बेहतर होने की दिशा में अग्रसर रहे हैं।
सऊदी अरब ने 25 साल के बाद वर्ष 2015 में बगदाद में अपना दूतावास खोला जबकि फरवरी 2016 में इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र के केन्द्र अरबील में अपना वाणिज्य दूतावास भी खोला।
इस बीच रियाज़ और बगदाद के बीच डिप्लोमैटिक आवाजाही में भी वृद्धि हुई।
पिछले बुधवार को 100 व्यक्तियों पर आधारित सऊदी अरब का एक आर्थिक और सुरक्षा प्रतिनिधिमंडल इराक की यात्रा पर गया और बगदाद में दोनों देशों के अधिकारियों ने एक दूसरे से भेंटवार्ता की।
इराक जाने वालों में सात सऊदी मंत्री भी शामिल थे। दोनों देशों के संबंधों में यह प्रगति उस समय हुई है जब 25 वर्षों तक यानी 1990 से लेकर 2015 तक दोनों के बीच डिप्लोमैटिक संबंध नहीं थे।
सऊदी अरब का इराक से निकट होने का सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य इराक में ईरान के प्रभाव को रोकना और बगदाद को तेहरान से दूर रखना है।
सऊदी प्रतिनिधिमंडल की इराक यात्रा ऐसी स्थिति में हो रही है जब अभी पिछले महीने ही ईरान के राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी इराक की यात्रा पर गये थे और वहां उन्होंने इराक के राजनीति और धार्मिक अधिकारियों से भेंटवार्ता की थी।
राष्ट्रपति रूहानी की इराक यात्रा के दौरान तय यह पाया कि दोनों देशों के व्यापारिक लेन- देन के स्तर को इस समय के 12 अरब डालर से बढ़ाकर अगले दो वर्षों में 20 अरब डालर तक पहुंचाया दिया जाये।
सऊदी अरब अपनी आर्थिक क्षमता का प्रयोग करके ईरान- इराक संबंधों में विघ्न उत्पन्न करके इराक के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को मज़बूत और विस्तृत करने की चेष्टा में है। सऊदी अरब के वाणिज्य कक्ष के अध्यक्ष की घोषणा के अनुसार वर्ष 2018 में इराक को सऊदी अरब के उत्पादों का निर्यात दो दशमलव 6 अरब डालर तक पहुंच गया।
इराक की यात्रा पर जाने वाले सऊदी प्रतिनिधिमंडल ने घोषणा की थी कि वह इराकी जनता के लिए एक स्टेडियम का निर्माण करेगा किन्तु सऊदी नरेश सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ के आदेश से एक खेल सीटी का निर्माण करके इराकी जनता के हवाले किया जायेगा जिस पर एक अरब डालर की लागत आयेगी और उसे इराकी जनता को उपहार स्वरूप दिया जायेगा।
सऊदी अरब की ओर से इस बात की घोषणा इस बात की सूचक है कि रियाज़ इराक की आर्थिक कमज़ोरी का लाभ उठाना चाहता है और वह आर्थिक मार्ग से एक ओर इराक में अपना प्रभाव बढ़ाना है तो दूसरी ओर तेहरान- बगदाद संबंधों में विघ्न उत्पन्न करना चाहता है।



















