नई दिल्ली: फिल्म इंडस्ट्री से ‘मी टू’ अभियान (यौन उत्पीड़न के खिलाफ अभियान) की शुरुआत होने के बाद इसकी चपेट में मीडिया जगत भी आ गया है और इसकी लपटें मोदी सरकार के एक मंत्री को अपने लपेटे में ले रही हैं। अपने समय के मशहूर संपादक व वर्तमान में केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री एम.जे.अकबर पर दो महिला पत्रकारों ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। पत्रकार प्रिया रमानी द्वारा विदेश राज्य मंत्री एम.जे.अकबर पर आरोप लगाने के एक दिन बाद, उनकी पूर्व सहयोगी प्रेरणा सिंह बिंद्रा ने भी उन पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए।

अखबार ‘द टेलीग्राफ’ ने मंगलवार को रमानी और न्यूज पोर्टल फर्स्टपोस्ट में एक अनाम लेखिका के ट्वीट पर आधारित खबर चलाई। संयोग की बात है कि अकबर द टेलीग्राफ के संस्थापक संपादक रह चुके हैं। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने मंगलवार को अकबर के विरुद्ध लगे आरोपों पर मीडिया को कोई जवाब नहीं दिया। पत्रकारों ने उनसे जब जोर देकर पूछा कि क्या इस मामले में कोई जांच होगी, तो वह बिना उत्तर दिए वहां से चली गईं।

रमानी ने सोमवार को एक लेख के बारे में ट्वीट किया, जिसे उन्होंने 2017 में वोग पत्रिका के लिए लिखा था। उन्होंने कहा, “मैंने अपने इस लेख की शुरुआत मेरी एमजे अकबर स्टोरी के साथ की थी। उनका नाम कभी नहीं लिया क्योंकि उन्होंने कुछ ‘किया’ नहीं था।” उन्होंने अकबर को ‘प्रेडेटर’ भी कहा।
रमानी ने मंगलवार को ट्वीट कर कहा, “एक छोटी कहानी ऐसे की तरफ से जिसने उनके साथ काम किया था। एमजे अकबर कभी अवसर को नहीं चूकते थे।” अनाम महिला पत्रकार की स्टोरी में अकबर का नाम तो नहीं लिया गया, लेकिन उन्हें बांबे, दिल्ली और लंदन से एकसाथ प्रकाशित होने वाले अखबार (एशियन एज) का बॉस कह कर संबोधित किया गया।
पत्रकार ने कहा कि उसे होटल की लॉबी में घंटों इंतजार करना पड़ा और जब वह अपनी बैठकें कर रात 9.30 बजे वापस आए तो उससे पूछा गया कि क्या वह यहां रुकना चाहती है। पत्रकार ने कहा कि ‘जब मैंने मना किया तो उन्होंने शालीनतापूर्वक मुझसे कहा कि कार्यालय की कार ले जाओ और मुझे घर भेजा। लेकिन, इस घटना के बाद मैं कभी उनके पसंद के लोगों में नहीं रही।’
बिंद्रा ने रविवार को अकबर के विरुद्ध आरोप लगाए थे लेकिन उनका नाम नहीं लिया और कहा था, “वह एक प्रतिभावान, चमकीले संपादक थे जो राजनीति में चले गए। आधी रात का संस्करण पूरा करने के बाद उन्होंने मुझे अपने पहले काम की चर्चा के लिए अपने होटल रूम में बुलाया था..जब मैंने मना कर दिया तो उन्होंने मेरे काम के समय मेरी जिंदगी को नरक बना दिया। कई सारी बाध्यताओं की वजह से बोल नहीं सकी। लेकिन हां, मी टू इंडिया।”
उन्होंने कहा, “वह एमजे अकबर थे। मैं इसे हल्के में नहीं कह रही हूं..मैं फर्जी आरोपों का परिणाम जानती हूं। इस घटना को हुए 17 वर्ष हो गए और मेरे पास कोई ठोस सबूत नहीं है। लेकिन तब मैं कम उम्र की थी, तुरंत ही फीचर संपादक बनी थी, हमारे प्रतिभावान संपादक और संवेदनशील संपादक से प्रभावित थी।”
बिंद्रा ने कहा, “लेकिन महान व्यक्तियों की भी कमजोरी होती है। मैंने इस स्टोरी के बारे में पहले के ट्वीट में लिखा है। मैंने हमारी बातचीत को इंज्वॉय किया-वह विनोदपूर्ण और बुद्धिमान थे, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मैं उपलब्ध थी। मैंने जब रात में होटल जाने से मना कर दिया, तो चीजें खराब हो गईं।”
उन्होंने कहा, “एक बार जब पूरी फीचर टीम के साथ हम बैठक कर रहे थे, उन्होंने भद्दी टिप्पणी की। एक लड़की ने मुझे कहा कि उसे भी अकबर ने होटल बुलाया था। मैं शहर में अकेली थी, निजी तौर पर लड़ाइयां लड़ रही थी। मैं शांत रही।” बिंद्रा ने कहा, “एक बार मैं मुंबई मंत्रालय एक स्टोरी के सिलसिले में गई और एक अधिकारी ने मुझे जबरन पकड़ने की कोशिश की। मैंने सोचा कि इसकी शिकायत मैं किससे करूं, मेरा संपादक भी तो ऐसा ही है। मैं एए से चली गई। अधिकारी के भ्रष्टाचार के बारे में पता किया, लेकिन अगले अखबार ने इसे छापने से मना कर दिया।”



















