अल्लाह की शान कि यह बैक्टीरिया ग्रह की ऐसी जलीय स्थानों पर भी जीवित रहते हैं जहां जीवन पनपने की संभावना बहुत कम होती है। अब इसी तह समुद्र लीजिए जहां टाई टैंक ढाँचा आराम फरमा रहा है। वहाँ ऑक्सीजन बहुत कम है। चारों ओर अंधेरे का राज है, जबकि पानी का जबरदस्त दबाव भी प्राणियों जीवन अपच बनाता यही नहीं, हालो मूनस टाइटैनिक नमक भरी समुद्री दलदलों में भी बसते पाए जा चुके। यह दलदलें समनदरवंके तरफ मदोजकृ कारण उपजी हैं।
होने के बाद जब दलदल पानी खाली हो, तो इसमें लवण बढ़ जाती हैं। चढ़ाव फिर एक्वामरीन आए तो नमक कम हो जाता है। सवाल यह है कि हालो मूनस टाइटैनिक नमक ऐसी जबरदस्त उतार-चढ़ाव का मुकाबला करते हुए कैसे जीवित रहते हैं?
दरअसल करोड़ों कोशिकाएं रखने वाला इंसान हो या हालो मूनस टाइटैनिक जैसे नन्हे मुन्ने यक जीवों बैक्टीरिया, सभी प्राणियों के कोशिकाओं को जीवित रहने के लिये पानी की आवश्यकता














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