पाकिस्तान की न्यूज वेबसाइट डॉन के अनुसार, ख़ालिद हुसैन रिज़वी पहले पाकिस्तान के पंजाब सरकार के रिलीजियस अफेयर डिपार्टमेंट में अधिकारी रह चुके हैं. अधिकारी रहते वो वहां पर अपनी दकयानूसी सोच और भड़काने वाले भाषण देते रहते थे, जिसके लिए उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया.
2018 का पाकिस्तान आम चुनाव इस बार कई मायनों में अलग होने वाला है. लेकिन इस तरह की कट्टरपंथी सोच रखने वाली कई और राजनैतिक पार्टियां भी चनावी मैदान में हैं, जिसमें से एक प्रमुख पार्टी आतंकवादी हाफ़िज़ सईद की भी है, जिसने पहले “मिल्ली मुस्लिम लीग” के बैनर तले अपनी पार्टी का रजिस्ट्रेशन करवाया. लेकिन जब पाकिस्तान चुनाव ने इस पर रोक लगा दी तो “अल्लाह हो अकबर तहरीक” नामक पार्टी के बैनर तले सारे आतंकवादियों को चुनाव के मैदान में उतार दिया. इसी सोच के साथ पाकिस्तान की सत्ता में आने को बेताब है इस तरह के चरमपंथी गुट.
पाकिस्तान में दूसरे राजनीतिक दलों के प्रमुख महिला नेताओं को स्टार प्रचारकों के रूप में भी रखा है. साथ ही महिला उम्मीदवार भी जोर-शोर से चुनाव प्रचार में लगी हैं. वहीं “तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान पार्टी” ने महिला उम्मीदवारों का चेहरा ही गायब कर दिया है. यहां तक कि महिला उम्मीदवार रैलियों के माध्यम से भी चुनावी अभियान में हिस्सा नहीं ले सकते हैं. उनके बदले तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान पार्टी के मुखिया हैं. ख़ालिद हुसैन रिज़वी और अन्य दूसरे पुरुष नेताओं ने ही चुनावी प्रचार की कमान संभल रखी है.
















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