ईरान की इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने फ़ार्सी कवियों और साहित्यकारों से मुलाक़ात में फ़ार्सी भाषा और साहित्य की रक्षा और विकास के लिए संबंधित संस्थाओं के सघन प्रयास पर ज़ोर दिया।
पैग़म्बरे इस्लाम के पौत्र हज़रत इमाम हसन अलैहिस्सलाम के शुभ जन्म दिवस के उपलक्ष्य में होने वाली इस मुलाक़ात में कुछ कवियों ने अपने शेर पढ़े।
आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने इस्लामी क्रान्ति से संबंधित शायरी के विकास की सराहना की और कहा कि क्रान्ति के संबंधित शायरी उम्मीद की किरण जगाती है। उन्होंने कहा कि फ़ारसी शायरी के असली रूप की रक्षा ज़रूरी है।
इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने कहा कि हाफ़िज़, सअदी, फ़िरदौसी और मौलाना जैसे महान शायरों की शायरी में नैतिकता भी है, शिक्षा भी है, प्रतिबद्धता भी है, दर्शनशास्त्र और अध्यात्म भी है इसी तरह इन शेयरों में असली इस्लाम को भी पेश किया गया है अतः इन विषयों को एक दूसरे से अलग करना उचित वर्गीकरण नहीं है।
इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने कहा कि शायरी को ईश्वरीय शिक्षाओं, आस्थाओं पैग़म्बरे इस्लाम और उनके परिजनों की विशेषताओं तथा इस्लामी जगत के मुद्दों बयान करने के लिए प्रयोग किया जाना चाहिए।


















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