-अली हसनैन आब्दी फ़ैज़
निर्भया गैंगरेप के चारों दोषियों को शुक्रवार सुबह तिहाड़ जेल में फांसी के फंदे पर लटकाया गया. साल 2012 में दिल्ली में एक बस में इन दंरिदों ने निर्भया के साथ गैंगरेप किया था, जिसके बाद उसकी मौत हो गई थी.

तिहाड़ जेल में निर्भया के चारों दोषी को फांसी16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में हुआ था गैंगरेप.साल 2012 में राजधानी दिल्ली में हुए निर्भया गैंगरेप कांड में आज करीब सवा सात साल के बाद इंसाफ हुआ है. तिहाड़ जेल के फांसी घर में शुक्रवार सुबह ठीक 5.30 बजे निर्भया के चारों दोषियों को फांसी दी गई. निर्भया के चारों दोषियों विनय, अक्षय, मुकेश और पवन गुप्ता को एक साथ फांसी के फंदे पर लटकाया गया और अब इनके शवों को पोस्टमार्टम के लिए ले जाया जाएगा.
Justice has prevailed.
It is of utmost importance to ensure dignity and safety of women.
Our Nari Shakti has excelled in every field. Together, we have to build a nation where the focus is on women empowerment, where there is emphasis on equality and opportunity.
— Narendra Modi (@narendramodi) March 20, 2020
Nari Tu Narayani !
She is Seema Samruddhi, Nirbhaya's lawyer who has brought justice to Nirbhaya.
This was her maiden case.
Proud of her. After 8 years finally Nirbhaya got Justice.
Respect to Asha Devi ma’am for never loosing hope. 🙏#NirbhayaVerdict #NirbhayaGotJustice pic.twitter.com/O81Klez3Px
— Harshadha Shirodkar (Modi's Family)🇮🇳 (@shirodkarharshu) March 19, 2020
सात साल 3 महीने और तीन दिन पहले यानी 16 दिसंबर 2012 को देश की राजधानी में हुई इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था. सड़कों पर युवाओं का सैलाब इंसाफ मांगने के लिए निकला था और आज जाकर उसका नतीजा निकला है.
WATCH | "I dedicate this day – March 20 to all the women in the country because #Nirbhaya got justice today": Nirbhaya's mother Asha Devi after four convicts' hanging.#NirbhayaCase pic.twitter.com/eHwM03aF0c
— NDTV (@ndtv) March 20, 2020
निर्भया की मां आशा देवी ने लंबे समय तक इंसाफ के लिए लड़ाई लड़ी, आज जब दोषियों को फांसी दी गई तो उन्होंने ऐलान किया कि 20 मार्च को वह निर्भया दिवस के रूप में मनाएंगी. आशा देवी का कहना है कि वह अब देश की दूसरी बेटियों के लिए लड़ाई लड़ेंगी.
The endless struggle of a mother has come to an end. She will be remembered as the mother fought for justice 🙏🏽
Nirbhaya can now Rest In Peace 😔 pic.twitter.com/QJcPmZ43UW— Vivek Raj (@VivekRa37653402) March 20, 2020
निर्भया के चारों दोषियों की ओर से आखिरी वक्त तक फांसी को टालने की कोशिश की गई. वकील एपी सिंह ने फांसी के दिन से एक दिन पहले दिल्ली हाई कोर्ट में डेथ वारंट को टालने के लिए याचिका दायर की गई, लेकिन इसमें दोषियों के खिलाफ फैसला आयाआधी रात को वकील एपी सिंह ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और जब सर्वोच्च अदालत बैठी तो वहां भी निर्भया के दोषी कुछ ऐसी दलील नहीं दे सके जिसकी वजह से ये फांसी टले. हालांकि, एपी सिंह लगातार इस फांसी को गलत बताते रहे और मीडिया-अदालत और राजनीति पर आरोप मढ़ते रहे.
16 दिसंबर 2012 की रात को हिंदुस्तान में कोई शख्स नहीं भूल सकता. राजधानी दिल्ली के मुनिरका में 6 लोगों ने चलती बस में पैरामेडिकल की छात्रा से गैंगरेप किया. इस मामले में दरिंदगी की वो सारी हदें पार की गईं, जिसे देखकर-सुनकर कोई दरिंदा भी दहशत में आ जाए. वारदात के वक्त पीड़िता का दोस्त भी बस में था. दोषियों ने उसके साथ भी मारपीट की थी. इसके बाद युवती और दोस्त को चलती बस से बाहर फेंक दिया था.पीड़िता का दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज चल रहा था, लेकिन हालत में सुधार नहीं होने पर उसे सिंगापुर भेजा गया. वहां अस्पताल में इलाज के दौरान 29 दिसंबर को पीड़िता जिंदगी की जंग हार गई. पीड़िता की मां ने बताया था कि वह आखिरी दम तक जीना चाहती थी.


















