इसके अलावा देश के अन्य रेलवे जोनों ने भी इसी तरह से कई गाड़ियों के आगमन समय को बढ़ाकर लेटलतीफी को कम करने की कोशिश की है, लेकिन सवाल यह उठता है कि इस तरह की कोशिशों से समस्या का फौरी निदान होता हुआ तो दिखेगा, लेकिन लोगों की परेशानी जस की तस रहेगी.
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