नई दिल्ली : संकट से जूझ रहे दूरसंचार क्षेत्र के बारे में भारती इंटरप्राइजेज के चेयरमैन सुनील मित्तल का कहना है कि इसका भविष्य जियो के अगले कदम पर निर्भर करता है। मित्तल ने दावोस में ईटी नाऊ को दिए गए साक्षात्कार में यह बात कही है। उन्होंने यह भी कहा है कि कंपनियां खुद अपना नुकसान कर रही हैं और हमें इसका समाधान करना होगा।

मित्तल ने कहा, ‘दूरसंचार उद्योग की हालत बदतर होती जा रही है और यही कारण है कि आठ कंपनियों को अपना कारोबार बंद करना पड़ा है। 45-50 अरब डॉलर को राइट ऑफ कर दिया गया है। टाटा, टेलिनॉर, एयरसेल और रिलायंस कम्युनिकेशंस जैसी बड़ी कंपनियों को अंततः क्षेत्र से निकलना पड़ा और अब केवल तीन कंपनियां बची हुई हैं।
दूसरी और तीसरी सबसे बड़ी कंपनी वोडाफोन इंडिया और आइडिया सेल्यूलर को अपने अस्तित्व को बचाने के लिए एक दूसरे में विलय करना पड़ा। स्पेक्ट्रम की कीमतें बहुत अधिक हो चुकी हैं। पीछे मुड़कर देखें, तो जिन पैसों को नेटवर्क और डिजिटल इकोसिस्टम बनाने में इस्तेमाल होना था, उनका इस्तेमाल सरकार के राजकोषीय घाटे की पूर्ति के लिए किया गया।’
नंबर वन दूरसंचार सेवा प्रदाता का तमगा खोने पर उन्होंने कहा, ‘इसका हमें दुख नहीं है, क्योंकि हम 20 साल तक पहले पायदान पर रहे। अब बाजार में तीन प्लेयर हैं और सभी मजबूत हैं। ब्रिटेन, जर्मनी और इटली में भी इतनी ही संख्या में ऑपरेटर हैं।’
प्राइसिंग के पिछले स्तर पर नहीं लौटने के बारे में मित्तल कहते हैं, ‘यह नए ऑपरेटर (जियो) पर निर्भर करता है, क्योंकि वह बहुत अधिक सब्सिडी दे रहा है। जियो के आने से पहले प्रति ग्राहक प्राइसिंग 300 रुपये थी और डेटा की खपत भी बेहद कम थी। आज की तारीख में डेटा की खपत 11-12 गुना बढ़ चुकी है, ऐसे में क्या 300 रुपये पर वापस लौटना संभव है?’
उन्होंने कहा, ‘यह संभव है, लेकिन कोई भी ऑपरेट ऐसा नहीं करना चाहता। मुझे लगता है कि अगर हम अपने मुद्दे आपस में ही सुलझा लें, तो सरकार बहुत खुश होगी।’




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