
सियासी पंडित की अगर माने तो सियासत का ये खेल नया नहीं है, चुनाव जीतकर सियासत की कुर्सी पे विराजमान होते ही हर पार्टी ऐसा करती है, बेचारी मासूम जनता सब कुछ भूल के फिर वफादारी निभाने के लिए लाइन में लग जाती है फिर पांच साल तक उन्ही नेता के ज़ुल्म ओ सितम का शिकार होती है.


















