
ख़ैर ऐसा करना सियासत के अखाड़े के दानिश्वरों के बांए हाथ का खेल रहता है, क्योँ कि अगर चुनाव जीतने के बाद भी जनता को याद रखा तो वक़्त- वक़्त पर इनकी मदद करना ज़रूरी हो जाएगा, इस लिए सियासी लीडर नया खेल शुरू करते है. ऐसे ताने बाने बुनते है जिसमे बेचारी जनता सब कुछ भूल कर नित नई परेशानी में उलझ जाती है,


















