(Shiaqaum.com) : वोटों के भिकारी नेता घर- घर जा चुके- वोट मांगने की गुहार लगा चुके, अब बारी हमारी है, किसकी क़िस्मत आज चमकने वाली है वोट करे क्योँकि अब हमारी बारी है- किसको वोट करे किसको ख़ुश करें- सोचों भैय्या जल्दी करो वोट डालने के लिए बूथ पर पहुचों-हमको अपने हक़ का इस्तेमाल करना है, एक वोट क़ीमती है- वोट करें जी वोट करें.

अभी चंद महीने की ही बात है जब इसी जनता जनार्दन के सहयोग से सियासत की कुर्सी पे विराजमान हुवे थे. उस वक़्त मानो ऐसा लग रहा था कि इनको बादशाहत विरसे में मिली हो, जनता के सहयोग को पल में दिक्कारते हुवे ऐसा जताते थे कि पहचानते ही न हो.
















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