इस संबंध में जानकारी प्रदान करते हुए डॉक्टर नीर ने बताया कि उन्होंने अपनी टीम के साथ विश्वविद्यालय साउथ थींपटन की प्रयोगशाला में पिछले पांच सालों से इस पर काम करने के बाद इस टीके की तैयारी की दिशा में सफलता प्राप्त की है। यदि यह टीका सफल हो जाता है, तो दुनिया भर में क्रांतिकारी दवा पैदा हो जाएगी और दुनिया भर के लाखों लोगों को इन बीमारियों से बचा लिया जाएगा।















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