” महेेन्द्र कुमार सैनी ”
इंसान के दिल के अरमान आसूओं मे बह जाने वाली बात वाकई में उस वक्त चरितार्थ हुईं, जब एनडीए की ओर से रामनाथ कोविंद के राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी पर मोहर लग गई। हुआ ये कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी की राष्ट्रपति भवन जाने की आखिरी इच्छा खत्म हो गई है। पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी लम्बे समय तक देश के प्रधानमंत्री बनने का ख्वाब देखते रहे लेकिन उनका ये ख्वाब कभी पूरा नहीं हो सका।

और अब राष्ट्रपति बनने का ख्वाब भी अधूरा रह गया। पहले(2009) में कांग्रेस के हाथों पार्टी की हार ने उनके ख्वाब को तोड़ा, तो बाद में(2014) उनके शिष्य नरेन्द्र मोदी ने ही उनकी इच्छाओं पर प्रश्रचिन्ह लगा दिया। ऐसे में आड़वाणी का प्रधानमंत्री बनने का ख्वाब, ख्वाब ही बनकर रह गया। प्रधानमंत्री इन वेटिंग के नाम से तो उनपर जुमले तक बनने लगे। खैर जैसे-तैसे उन्होंने अपने मन को संभाल लिया कि इस जन्म में प्रधानमंत्री बनना मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन होगा।


















