लखनऊ। लखनऊ के कोरोना पॉजिटिव मरीजो का उपचार निजी मेडिकल कॉलेजों के भरोसे है, क्योकि 54 प्रतिशत से अधिक मरीज सिर्फ दो निजी मेडिकल कॉलेजों के हवाले किया गया है। लखनऊ में तीन सरकारीKGMU, SGPGI और लोहिया संस्थान सहित कुल 8 मेडिकल कॉलेज है।

लखनऊ में अबतक कुल 165 कोरोना के पॉजिटिव केस पाए गए है। इसमें से 9 मरीज अस्पतालों से डिस्चार्ज होचुके है और एक की मौत हो चुकी है, इस हिसाब से फिलहाल 155 केस सक्रिय है। इसमें से 47 मरीज एंटीगरल मेडिकल कॉलेज और 37 मरीज एरा लखनऊ मेडिकल कॉलेज(Era Medical College ) में स्वास्थ्य विभाग द्वारा भर्ती कराया गया है। इस हिसाब से दोनों निजी मेडिकल कॉलेजों को 84 मरीज दिए गए है, शेष 71 मरीजो को शहर के विभिन्न संस्थानों में भर्ती कराया गया है। मतलब एरा और एंटीगरल मेडिकल कॉलेज पर कुल 155 मरीजो का 54 प्रतिशत से अधिक लोड है।
54 प्रतिशत से अधिक मरीज सिर्फ दो संस्थानों के हवाले
इंटीग्रल विश्विद्यालय ने लगाया अव्यवस्था का आरोप
प्रधानाचार्य बोले बिना सूचना के ही पहुचाये जा रहे है क्षमता से अधिक मरीज
अगर सरकारी चिकित्सा संस्थानों व अस्पतालों में भर्ती कोविद-19 मरीजो की संख्या पर नज़र डालें तो अभी तक PGI के राजधानी कोविद अस्पताल में 8, KGMU में 5, लोहिया संस्थान में 12 और लोक बंधु अस्पताल में 2 मरीज भर्ती है। अगर देखा जाए तो लखनऊ के तीनों प्रमुख चिकित्सा संस्थानों का प्रतिवर्ष बजट लगभग 900 करोड़ है।

व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए एंटीगरल मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रोफेसर ज़फर इदरीस ने आरोप लगाया है कि सुविधा के नाम पर जिला प्रसाशन और स्वास्थ्य विभाग को योगदान अभी तक शून्य है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली सवाल उठाते हुए कहा कि उनको क्षमता से अधिक मरीज दिया गया है। पहले उन्हें सरकार की तरफ से 20 बेड का कोरोना अस्पताल बनाने का निर्देश दिया गया था, लेकिन जनहित में हमने 30 बेड का अस्पताल बनाया, जिसे बाद में स्वास्थ विभाग के कहने पर हमने 45 बेड का कोरोना अस्पताल तैयार किया।

इसके बाद भी cmo ने अस्पताल में कोरोना के 47 मरीज भेज दिए। रात को 2 बजे बिना किसी पूर्व की सूचना के गाड़ी मरीजो को लेकर अस्पताल आती है। स्वास्थ्य विभाग के कर्मी मरीजो को सामान्य रास्तो से लेकर आते है और मरीजो को कही भी लेकर खड़े हो जाते है। अचानक एम्बुलेंस आकर खड़ी हो जाती है, कहा से मरीज आये है कौन लेकर आया है कुछ नही बताया जाता है।
जो लोग मरीजो को लेकर आते है उनके द्वारा कोई सावधानी नही बरती जाती है। वह मरीजो को छोड़ कर चले जाते है और मरीज इधर उधर टहलने लगते है। रविवार को तो दो मरीज कसुअल्टी में घुस आए थे।
उन्होंने कहा कि हमे मरीजो के उपचार से कोई समस्या नही है, सरकार की मदद के लिए ही कोविद अस्पताल बनाया है, अगर सूची के साथ मरीज भेजने से पहले हमें सूचित कर दिया जाए तो हम सावधानी बरतते हुए अपनी तैयारी पूरी कर ले। उन्होंने कहा कि क्षमता से अधिक मरीज भेजने पर हमने cmo से बात की तो उन्होंने कहा कि आप के यहाँ बेड काफी दूर दूर है उसे नजदीक कर के एडजेस्ट कर लीजिए।
उन्होंने कहा कि जो उन्हें किट दी गयी है उनकी क्वालिटी काफी खराब है, इस संबंध में cmo से शिकायत की गई तो उन्होंने कहा कि आप को जल्द ही अच्छी किट उपलब्ध करा दी जयेगी। उन्होंने कहा कि पहले हम लोगो को किट के लिए बजट मिलने वाला था लेकिन अब cmo बोल रहे है कि अब सामान दिया जाएगा। आर्डर कैंसिल हो गया है जल्द की चिकित्सा उपकरण दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि रविवार को हमने अपने बजट से 10 लाख 54 हज़ार रुपये का सामान मंगया है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कोई सहयोग नही मिल रहा है। हम लोग मरीजो को बेहतर भोजन के साथ साथ चिकित्सा सुविधा अपने बजट से उपलब्ध करा रहे है।
उन्होंने शासन द्वारा धन आवंटन पर भी सवाल उठाया और कहा कि चिकित्सा उपकरण के लिए जिलो को भेजी गई धनराशि में भी मनमानी की गई। लखनऊ के साथ साथ गोरखपुर, झांसी और प्रयागराज को भी बराबर से ढाई ढाई करोड़ रुपया दिया गया, जबकि उक्त तीनों शहरों में एक एक मेडिकल कॉलेज और लखनऊ में कुल 8 मेडिकल कॉलेज है। उन्होंने कहा कि हम मरीजो का बेहतर उपचार कर रहे है और हर कदम पर सरकार के साथ है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग तथा जिला प्रसाशन को भी व्यवस्थित ढंग से हमारा सहयोग करना चाहिए।


















