एक जमाना था जब नक्खास और पारचे वाली गली मे समद और बब्बे कि चाय पर लोग टूट पड़ते थे। सर्दियों मे चाय और गर्मियों मे दोनों जगहों कि लस्सी मशहूर थी

लखनऊ मे बिकने वाली कश्मीरी चाय
सिर्फ नाम भर की कश्मीरी है, मगर उसका ताल्लुक खास इसी शहर से है
चौक–अमीनाबाद की दुकानों पर बढ़ी मांग, स्वाद में रच-बस गई नवाबी चाय
लखनऊ। सर्दियों की दस्तक के साथ ही राजधानी लखनऊ में कश्मीरी चाय एक बार फिर चर्चा में है। गुलाबी रंग, मेवे की खुशबू और हल्के नमकीन-मीठे स्वाद वाली यह चाय अब सिर्फ कश्मीर की पहचान नहीं रही, बल्कि पुराने लखनऊ की तहज़ीब का हिस्सा बन चुकी है।
चौक, अमीनाबाद और अकबरी गेट की पारंपरिक चाय दुकानों पर शाम ढलते ही कश्मीरी चाय के साथ बालाई अर्थात मलाई और एक तरह के समोसे कट शहरियों की सब से बड़ी मांग होती है।दीवाने जुटने लगते हैं। दुकानदारों के अनुसार ठंडक बढ़ते ही इसकी मांग में 30–40 प्रतिशत तक इज़ाफा हो जाता है। पिस्ता-बादाम से सजी यह चाय खासकर परिवारों और पर्यटकों को खूब भा रही है।
खाद्य विशेषज्ञों का कहना है कि कश्मीरी पत्तियों से बनी यह चाय न सिर्फ स्वाद में अलग है, बल्कि सर्द मौसम में शरीर को गर्म रखने में भी मददगार मानी जाती है। नवाबी शहर में अब यह चाय महफिलों, दावतों और खास मौकों की शान बन चुकी है।
— शहरनामा संवाददाता


















