इस कार्यकर्ता ने कहाः रोहिंग्या मुसमलानों को कही भी आने जाने की अनुमति नहीं थी और उनके जीवन का हर पल सैन्य अधिकारिंयों के कंट्रोल में है।
उन्होंने कहाः रोहिंग्याई मुसलमानों को म्यांमार में आने जाने पर बहुत से प्रतिबंधों को झेलना पड़ता है, उनकी शादियों यहां तक की होने वाली संतान तक पर निगरानी रखी जाती है, और दवाओं एवं खाद्य सामग्री तक मुसलमानों की पहुँच बहुत सीमित है।
इस कार्यकर्ता ने कहा कि रोहिंग्याई लड़कियों और महिलाओं का यौन शोषण और सामुहिक बलात्कार आम है, और यह अल्पसंख्यक रोहिंग्याई एक अमानवीय परिस्थियों में जीवन जी रहे हैं, और यह एक जनसंहार है।
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